General knowledge Most Important Questions With Answers In Hindi For NTPC, Group D, SSC, Railway

इसरो 2021 की शुरुआत में चंद्रयान 3 की लांच कर सकता है।

चंद्रयान-3 चंद्रयान-2 का उत्तराधिकारी है।हालांकि, चंद्रयान-2 के विपरित इसमें ‘ऑर्बिटर’ नहीं होगा लेकिन इसमें एक ‘लैंडर’ और एक ‘रोवर’ होगा और यह चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास करेगा। चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग के कारण यह चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।इसरो चीफ के अनुसार, चंद्रयान- 3 में लैंडर और रोवर के साथ एक प्रोपल्शन मॉड्यूल भी होगा।इसरो चीफ के अनुसार, चंद्रयान- 3 से संबंधित टीम तेजी से कम कर रही है और यह मिशन जल्दी ही पूरा हो जाएगा।
चंद्रयान -3 मिशन में लैंडर, रोवर, और प्रॉपल्शन मॉड्यूल के लिये 250 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जबकि मिशन के लॉन्च पर 365 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस प्रकार इस मिशन की कुल लागत 615 करोड़ रुपए होगी।जबकि चंद्रयान-2 की कुल लागत लगभग 1000 करोड़ रुपए थी।कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन ने इसरो की कई परियोजनाओं को प्रभावित किया और चंद्रयान-3 जैसे अभियान में भी इसी कारण देरी हुई।
चंद्रयान-2 को पिछले साल 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था। इसके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना थी। लेकिन लैंडर विक्रम ने 7 सितंबर को हार्ड लैंडिंग की और अपने प्रथम प्रयास में ही पृथ्वी के उपग्रह की सतह को छूने का भारत का सपना टूट गया था। हालांकिअभियान के तहत भेजा गया आर्बिटर अच्छा काम कर रहा है और जानकारी भेज रहा है।चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 का ही पुन: अभियान होगा और इसमें चंद्रयान-2 की तरह ही एक लैंडर और एक रोवर होगा। 
चंद्रयान-1 को 2008 में प्रक्षेपित किया गया था।चंद्रयान-1 के डेटा से पता चला था कि चांद के ध्रुव पर पानी है।
चंद्रयान मिशन में अब तक की सफलता
1)- चंद्रयान-1 से चांद पर पानी का पता चला।
2)- चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने में सफल रहा।
3)- पहली बार दक्षिणी ध्रुव पर किसी देश का मिशन पहुंचा।
4)- चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सही तरीके से काम कर रहा है।
💟👉 चीन का कृत्रिम सूरज….📚📚
👉चीन ने पहली बार अपने “कृत्रिम सूरज” परमाणु संलयन रिएक्टर को सफलतापूर्वक संचालित किया।
👉HL-2M टोकामक रिएक्टर चीन का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत परमाणु संलयन प्रौद्योगिकी अनुसंधान उपकरण है।
👉यह उपकरण एक शक्तिशाली स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के लिये मार्ग प्रशस्त करेगा।
👉यह गर्म प्लाज्मा को संलयित करने के लिए एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करता है और 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान तक पहुंच सकता है।
👉रिएक्टर को अक्सर उत्पन्न होने वाली प्रचंड गर्मी एवं ऊर्जा के कारण “कृत्रिम सूर्य” कहा जाता है।
👉इसमें गर्म प्लाज्मा को संलयित करने के लिये एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग किया गया है तथा इसमें तापमान को सूर्य के कोर के तापमान की तुलना में लगभग दस गुना अधिक तक गर्म (150 मिलियन डिग्री सेल्सियस) करने की क्षमता है।
👉एक परमाणु अभिक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमें दो नाभिक अथवा एक नाभिक और एक बाह्य उप-परमाणु कण एक या अधिक नए न्यूक्लाइड का उत्पादन करने के लिये आपस में टकराते हैं।
👉इस प्रकार एक परमाणु अभिक्रिया में कम-से-कम एक न्यूक्लाइड का दूसरे में परिवर्तन होना चाहिये।
👉नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया को दो हल्के परमाणुओं के संयोजन से एक भारी परमाणु नाभिक के निर्माण के रूप में परिभाषित किया जाता है। इस प्रक्रिया को परमाणु प्रतिक्रिया कहा जाता है। इससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। संलयन द्वारा बनाया गया नाभिक प्रारंभिक नाभिक की तुलना में भारी है।
💟👉केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)📚📚📚
👉केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में कार्य करती है। यह भारत में सबसे अग्रणी जांच करने वाली पुलिस एजेंसी है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख आपराधिक जांचों में शामिल रहती है। हालांकि, सीबीआई को कुछ आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। सीबीआई का एक निदेशक होता है जो एक आईपीएस अधिकारी होता है जिसका रैंक पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त (राज्य) के समकक्ष होता है। निदेशक की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाती hai..
 
👉केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भारत में इंटरपोल एजेंसी के रूप में भी कार्य करती है। सीबीआई की अपनी अकादमी भी है जो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित है। अकादमी की स्थापना सन 1966 में की गयी थी। पिछले कुछ वर्षों में यह एक प्रमुख पुलिस प्रशिक्षण संस्थान के रूप में उभरा है। सीबीआई ने कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में तीन क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी) भी खोले हुए हैं।
💟👉सीबीआई का विजन
👉सीबीआई का आदर्श वाक्य “उद्योग, निष्पक्षता और अखंडता” है। सीबीआई का विजन निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना है:
👉सावधानीपूर्वक जांच और अभियोजन पक्ष के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार से मुकाबला करना और आर्थिक और हिंसक अपराधों पर अंकुश लगाना।
👉विभिन्न कानूनी अदालतों में सफल जांच और मामलों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रभावी प्रणाली तथा प्रक्रियाओं को विकसित करना।
👉साइबर युद्ध और उच्च प्रौद्योगिकी अपराध में सहायता करना।
👉काम करने के लिए एक स्वस्थ माहौल का निर्माण करना जिससे टीम निर्माण, मुक्त संचार और आपसी विश्वास को प्रोत्साहन मिल सके।
👉राज्य पुलिस संगठनों और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग में कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करना, विशेष रूप से जांच और मामलों की पूछताछ के संबंध में।
👉राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ युद्ध में एक प्रमुख भूमिका निभाना।
👉मानवाधिकारों की रक्षा करना तथा पर्यावरण, कला, प्राचीन वस्तुओं और हमारी सभ्यता की विरासतों की रक्षा करना।
👉एक वैज्ञानिक सोच, मानवतावादी और जांच और सुधार की भावना को विकसित करना।
👉कामकाज के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता और व्यावसायिकता के लिए प्रयास करना, जिससे संगठन उपलब्धि के उच्चतम स्तर को हासिल कर सके।
💟👉सीबीआई संगठन
👉सीबीआई का एक निदेशक होता है जो एक आईपीएस अधिकारी होता है जिसका रैंक पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त (राज्य) के समकक्ष होता है। निदेशक की नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।
👉संशोधित विशेष दिल्ली पुलिस स्थापना अधिनियम सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति के लिए एक समिति का अधिकार देता है। समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल रहते हैं:
(1) प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
(2) विपक्ष के नेता
(3) भारत के मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा सिफारिश किए गये अन्य उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश।
💟👉सीबीआई के कार्य
👉सीबीआई के व्यापक कार्य निम्न की जांच करना है:
1) केन्द्र सरकार के सभी, विभागों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और केंद्रीय वित्तीय संस्थानों के सरकारी कर्मचारियों द्वारा किये गए भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों की जांच करना।
2) बैंक धोखाधड़ी, वित्तीय धोखाधड़ी, आयात-निर्यात और विदेशी मुद्रा विनिमय उल्लंघन, बंडे पैमाने पर मादक पदार्थों, प्राचीन वस्तुओं, सांस्कृतिक संपत्ति की तस्करी और अन्य वर्जित पदार्थों की तस्करी आदि सहित आर्थिक अपराधों की जांच करना।
3) विशेष अपराध जैसे आतंकवाद के मामले, बम विस्फोट, सनसनीखेज हत्या, फिरौती के लिए अपहरण और माफिया/अंडरवर्ल्ड द्वारा किए गए अपराधों की जांच करना।
💟👉सीबीआई का अधिकार क्षेत्र
👉सीबीआई को जांच की कानूनी शक्तियां दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 (डीएसपीई) से प्राप्त हैं। यह अधिनियम केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों के साथ सीबीआई के सदस्यों को समवर्ती और समकालीन अधिकार, कर्त्तव्य, विशेषाधिकार और उत्तरदायित्व प्रदान करता है। केन्द्र सरकार संघ शासित क्षेत्रों, संबंधित राज्य सरकार की सहमति के लिए जांच विषय के संदर्भ में सीबीआई के सदस्यों की शक्तियां और अधिकार क्षेत्रों के अलावा, किसी भी क्षेत्र में विस्तार कर सकती है। सीबीआई केवल डीएसपीई एक्ट के तहत केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित अपराधों की ही की जांच कर सकती है।
👉राज्य पुलिस बनाम सीबीआई
👉मुख्य रूप से राज्य में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य पुलिस की होती है। सीबीआई निम्न मामलों में जांच कर सकती हैं:
👉वे मामले जो अनिवार्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों या केंद्र सरकार के विषयगत मामलों के खिलाफ हैं।
👉वे मामले जिनमें केंद्र सरकार के वित्तीय हित शामिल हैं।
वे मामले जो प्रवर्तन के साथ केंद्रीय कानूनों के उल्लंघन से संबंधित है जो कि भारत सरकार की चिंता का मुख्य विषय हैं।
👉धोखाधड़ी, बेईमानी, गबन के बड़े मामले और इसी तरह के अन्य मामले जहां इन मामलों को संगठित गिरोह या कई राज्यों में असर रखने वाले पेशेवर अपराधियों द्वारा चलाया जाता है।
👉वे मामले जिनका अंतर्राजीय और अंतर्राष्‍ट्रीय असर होता है और जहां इसमें कई सरकारी एजेंसियों को शामिल करना अनिवार्य होता है, ऐसे में एक एकल जांच एजेंसी जांच पडताल करने के लिए सर्वे-सर्वा होती है।
💟👉आलोचना
हालांकि सीबीआई ने देश के आर्थिक सेहत को बचाने और कई कठिन मामलों को सुलझाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन विभिन्न आधारों पर इसकी आलोचना भी की गई है। भाई-भतीजावाद, गलत तरीके से अभियोजन पक्ष और भ्रष्टाचार में उलझाने के लिए कई बार इसकी आलोचना हुई है। कई घोटालों पर अपने दुर्व्यवहार के लिए सीबीआई की आलोचना की गई है। केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए भी सीबीआई की आलोचना की गई है। कई राजनीतिक और संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई के पास स्वतंत्र जांच एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए स्वायत्तता की आवश्यकता का अभाव है। इसके अलावा, सीबीआई के अस्तित्व और ऑपरेशन को कोई भी कानूनी ढांचा प्राप्त नहीं हैं।
💟👉भारत का महान्यायवादी📚📚📚
👉अनुच्छेद 76 और 78 भारत के महान्यायवादी के साथ संबन्धित है| भारत के महान्यायवादी देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है। वह सभी कानूनी मामलों में सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार होता है। राष्ट्रपति, महान्यायवादी की नियुक्त करता है| जो व्यक्ति (महान्यायवादी) नियुक्त किया जाता है उसकी योग्यता सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश होने लायक होनी चाहिए। वह भारत का नागरिक होना चाहिए और दस साल के लिए उच्च न्यायलय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए|
💟👉नियुक्ति और पदावधि
👉संविधान, महान्यायवादी को निश्चित पदअवधि प्रदान नहीं करता है। इसलिए, वह राष्ट्रपति की मर्ज़ी के अनुसार ही कार्यरत रहता है| उसे किसी भी समय राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है| उसे हटाने के लिए संविधान में कोई भी प्रक्रिया या आधार उल्लेखित नहीं है।
👉महान्यायवादी वही पारिश्रमिक प्राप्त करता है जो राष्ट्रपति निर्धारित करता है| संविधान के महान्यायवादी का पारिश्रमिक निर्धारित नहीं किया है।
💟👉कर्तव्य और कार्य
👉महान्यायवादी के कर्तव्य और कार्य निम्नलिखित हैं:
(1) वह कानूनी मामलों पर भारत सरकार को सलाह देता है जो राष्ट्रपति द्वारा उसे भेजे या आवंटित किए जाते हैं|
(2) वह राष्ट्रपति द्वारा भेजे या आवंटित किए गए कानूनी चरित्र के अन्य कर्तव्यों का प्रदर्शन करता है।
(3) वह संविधान के द्वारा या किसी अन्य कानून के तहत उस पर सौंपे गए कृत्यों का निर्वहन करता है ।
💟👉अपने सरकारी कर्तव्यों के निष्पादन में,
(1) वह भारत सरकार का विधि अधिकारी होता है, जो सुप्रीम कोर्ट में सभी मामलों में भारत सरकार का पक्ष रखता है।
(2) जहाँ भी भारत की सरकार को किसी क़ानूनी सलाह की जरुरत होती है, वह अपनी राय से सरकार को अवगत कराता है ।
💟👉अधिकार और सीमाएं

👉महान्यायवादी के अधिकार निम्नलिखित हैं:
(1) अपने कर्तव्यों के निष्पादन में, वह भारत के राज्य क्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार रखता है।
(2) उसे संसद के दोनों सदनों या उनके संयुक्त बैठकों की कार्यवाही में हिस्सा लेने का अधिकार है, परंतु उसे वोट देने का अधिकार नहीं है (अनुच्छेद 88)|
(3) उसे संसद की किसी भी समिति में जिसमें वह सदस्य के रूप में नामांकित हो बोलने का अधिकार या भाग लेने का अधिकार है, परंतु वोट डालने का अधिकार नहीं है (अनुच्छेद 88)|
(4) वह उन सभी विशेषाधिकारों और प्रतिरक्षाओं को प्राप्त करता है जो संसद के एक सदस्य के लिए उपलब्ध होतीं है|
💟👉नीचे वर्णित महान्यायवादी पर निर्धारित की गई सीमाएं हैं:
(1) वह अपनी राय को भारत सरकार के ऊपर थोप नहीं सकता है|
(2) वह भारत सरकार की अनुमति के बिना आपराधिक मामलों में आरोपियों का बचाव नहीं कर सकता है ।
(3) वह सरकार की अनुमति के बिना किसी भी कंपनी में एक निदेशक के रूप में नियुक्ति को स्वीकार नहीं कर सकता है|
👉यह ध्यान दिये जाने वाली बात है कि महान्यायवादी को निजी कानूनी अभ्यास से वंचित नहीं किया जाता है| वह सरकारी कर्मचारी नहीं होता है क्योंकि उसे निश्चित वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है और उसका पारिश्रमिक राष्ट्रपति निर्धारित करता है
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कर दिखाओ कुछ ऐसा की दुनिया करना चाहे तुम्हारे जैसा।🥰🔥

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